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कानून को आगे बढ़ाना
व्यक्तिगत चोट और रोज़गार कानून के क्षेत्रों में, अपने मुवक्किलों के लिए सबसे बढ़िया नतीजे हासिल करने का आमतौर पर मतलब होता है जितनी जल्दी हो सके मुकदमे या सुनवाई में बिना किसी देरी और खर्च के संतोषजनक समाधान पर पहुंचना। हालांकि, जब सिर्फ़ |
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मुआवज़ा लेना ही जरूरी |
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होता है, या कोई खास कानूनी बिंदु जुड़ा होता है, तो करांजा के वकीलों का आर्बिट्रेटरों और जज़ों के सामने सफलता प्राप्त करने का सकारात्मक रिकॉर्ड है।
थ्रेसोल्ड - दर्द और तकलीफ के लिए मुकदमे का अधिकार ब्रान्को बनाम एलिआंज़ (Branco v. Allianz) ओंटेरियो में 1996 से कार एक्सीडेंट में घायल एक व्यक्ति गैर-आर्थिक नुकसानों ("दर्द और तकलीफ") के लिए तब तक मुकदमा नहीं कर सकता जब तक कि उसके "किसी खास शारीरिक, मानसिक या मनौवैज्ञानिक काम करने पर स्थाई रूप से गंभीर विकलांगता" न आई हो। इसे "थ्रेसोल्ड" कहा जाता है।
सुश्री ब्रान्को एक कार दुर्घटना में घायल हो गई थीं जिसका नतीज़ा यह हुआ कि उनकी गर्दन में एक ऐंठी हुई नस और कंधे में जकड़न की वजह से उनके दाएं कंधे और हाथ में भयंकर दर्द पैदा हो गया। वे बहुत लंबे समय से डेंटल असिस्टेंट के तौर पर काम कर रही थीं। हाथ में दिक्कत होने की वजह से वो उस काम पर वापस नहीं लौट पाईं। लेकिन उन्होंने स्कूल बोर्ड के लिए एक सप्लाई टीचर और लंच रूम असिस्टेंट के तौर पर काम करना शुरू कर दिया और उनकी आमदनी पहले से कम हो गई। मुद्दा यह उठा कि क्या उनकी विकलांगता "गंभीर" है। केविन डोआन ने सफलतापूर्वक बहस की, और जज़ ने कहा कि यदि "विकलांगता ऐसी है जो व्यक्ति को उसकी पसंद के अनुसार काम करने की उसकी काबिलियत पर इस तरह असर डालती है कि उसके भविष्य का रास्ता ही बंद हो जाए", तो यह गंभीर है, और इसलिए सुश्री ब्रान्को को थ्रेसोल्ड मिला।
डिस्कवरेबिलिटी - कार एक्सीडेंट के बाद मुकदमा करने का अधिकार क्लार्क बनाम कैरोल (Clark v. Carroll) सुश्री कैरोल का एक एक्सीडेंट हो गया था और जब वे हमारे ऑफिस में आईं तो एक्सीडेंट के लिए मुकदमा शुरू करने की दो वर्ष की समय-सीमा पहले ही खत्म हो चुकी थी। आमतौर पर इसका नतीज़ा एक्सीडेंट के लिए दोषी व्यक्ति से मुआवज़ा हासिल करने की किसी प्रकार की काबिलियत के पूरी तरह खत्म हो जाने के रूप में होता है। फिर भी केली कैंपबेल जज़ को यह समझाने में कामयाब रहीं कि इस मामले में समय-सीमा के नियम का अपवाद लागू होता है क्योंकि एक्सीडेंट के तुरंत बाद सुश्री क्लार्क को पता नहीं था कि उनकी चोटें स्थाई और गंभीर हैं और चूंकि एक मुकदमा दायर करने के लिए यह एक पूर्वशर्त है, इसलिए उनसे समय-सीमा के भीतर मुकदमा दायर करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
नुकसानों को कम करना ब्रान्को बनाम एप्स्टीन (Branco v. Ephstein), इस मामले में, डिवीजनल कोर्ट ने व्यवस्था दी कि सुश्री ब्रान्को के ट्रायल जज़ ने ज़ूरी को सही तरीके से इस तथ्य की सूचना नहीं दी कि यदि प्रतिवादी को यकीन है कि घायल पीड़ित ने अपनी ज़िंदगी और खासतौर पर अपनी आमदनी पर एक्सीडेंट के असर को कम करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए थे, तो प्रतिवादी को यह साबित करना पड़ेगा कि क्या कदम उठाए जाने चाहिए और वे किस तरह नतीज़ों को बदल सकते हैं। इस मामले में, सुश्री ब्रान्को की चोटों ने डेंटल हाइजीनिएस्ट के तौर पर उन्हें काम पर लौटने से वंचित कर दिया था, इसलिए उन्होंने एक स्कूल में पार्टटाइम नौकरी ढूंढ ली थी। प्रतिवादी ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका कि अपनी आमदनी को एक्सीडेंट से पहले वाले स्तर पर लाने के लिए वे क्या कर सकती हैं और उन्हें क्या करना चाहिए। केविन डोआन ने डिवीजनल कोर्ट में कम मुआवज़े के खिलाफ अपील की और नुकसानों पर एक नया मुकदमा जीत लिया।
दुर्घटना लाभों पर ब्याज शिवनाथन बनाम स्टेट फार्म (Sivananthan v. State Farm) स्टेट फार्म ने एक नामित मूल्यांकन केंद्र की रिपोर्ट जिसमें कहा गया था कि वे काम पर लौट सकती थीं, के बाद सुश्री शिवनाथन के इनकम रिप्लेसमेंट लाभों पर रोक लगा दी थी। मूल्यांकन ने अपनी ही जांच के नतीज़ों, जिसमें दिखाया गया था कि उन्हें गंभीर घबराहट संबंधी विकार था, की अनदेखी कर दी और यह मूल्यांकनकर्ता मनोवैज्ञानिक की राय कि वे सिर्फ पार्टटाइम काम करने के लायक थीं, फुलटाइम नहीं, का उल्लेख करने में भी चूक गया। मध्यस्थता में, सुश्री शिवनाथन इनकम रिप्लेसमेंट लाभों की हकदार थीं क्योंकि वे काम करने लायक नहीं रह गईं थीं। एक अपील के बाद, स्टेट फार्म ने उनके लाभ फिर से बहाल कर दिए और रोकी की गई अवधि का भी भुगतान कर दिया लेकिन पिछले लाभों पर ब्याज की अदायगी नहीं की।
जोसेफ कैंपीसी और मोइरा ग्रेसी ने कामयाबी के साथ दलील दी कि हालांकि कानून एक नामित मूल्यांकन केंद्र की राय के आधार पर बीमाकर्ता को लाभों के भुगतान पर रोक लगाने की इजाजत देता है, लेकिन यदि नामित मूल्यांकन केंद्र की राय गलत है तो बीमाकर्ता बकाया लाभों पर नियमों के मुताबिक ऊंची दर पर ब्याज के भुगतान के लिए जिम्मेदार है।
बीमा कंपनियों ने मान लिया है कि इस केस में अपील पर हमारी कामयाबी की वजह से, लाभों को रोकने के लिए डॉक्टरों की रिपोर्ट की मज़बूती और गुणवत्ता पर निर्भर होने से पहले उन्हें उनका सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना पड़ेगा - कुछ ऐसा जिसे हम हमेशा उनके घायल ग्राहकों के प्रति उनका कर्त्तव्य मानते हैं।
बीमा जांच (दुर्घटना लाभ दावे) निरवान बनाम किंग्स (Nirwan v. Kingsway) किंग्सवे ने श्री निरवान को इनकम रिप्लेसमेंट लाभ के लिए उनकी पात्रता के बारे में एक मध्यस्थता से ठीक पहले अपने एक डॉक्टर से जांच कराने के लिए मज़बूर करने की कोशिश की। जोसेफ कैंपीसी ने कामयाबी के साथ बहस की कि श्री निरवान ने डॉक्टरी जांच नहीं कराई क्योंकि बीमा कंपनी ने कानून द्वारा निर्धारित आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था, और इस तरह इस आक्रामक तरकीब से उन्हें बचाया।
बोरजा बनाम टीटीसी. (Borja v. TTC) एक टीटीसी बस से उतरते वक्त सुश्री बोरजा घायल हो गई थीं। उन्होंने टीटीसी द्वारा निर्धारित अनेक मेडिकल जांच नहीं करवाईं। चूंकि कानून कहता है कि इस प्रकार की जांच कराने से इनकार करना एक घायल व्यक्ति को बीमाकर्ता के साथ आर्बिट्रेट करने से रोकता है, इसलिए टीटीसी ने यह फैसला करने के लिए कि वे विकलांग हुई थीं और लाभों की पात्र हैं, मध्यस्थता सुनवाई की कार्रवाई से उन्हें रोकने की कोशिश की। सुश्री कैंपबेल ने कामयाबी के साथ दलील दी कि सुश्री बोरजा को मध्यस्थता की कार्रवाई से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि जांच कराने के नोटिस एक्सीडेंट बेनीफिट्स शेड्यूल के मुताबिक सही तरीके से नहीं बनाए गए थे। आर्बिट्रेटर सुश्री कैंपबेल से सहमत थे और उन्होंने व्यवस्था दी कि सुश्री बोरजा मध्यस्थता को जारी रख सकती हैं।
सुश्री बोरजा उस वक्त घायल हुई थीं जब उनके उतरते वक्त ड्राइवर ने बस के दरवाज़ों को बंद कर दिया था। उनका पर्स और कोट का किनारा उसमें अटक गया और फट गया। मध्यस्थता में, टीटीसी ने इनकार कर दिया कि ऐसी कोई घटना कभी हुई थी। आर्बिट्रेटर ने सुश्री बोरजा की दलील को मंज़ूर कर लिया और कहा कि वह घटना एक "एक्सीडेंट" थी। टीटीसी को ब्याज और लागतों के साथ उन लाभों का भुगतान करने का आदेश दिया गया जिसके लिए मुवक्किल पात्र थीं। नतीज़ा यह हुआ कि सुश्री बोरजा को पूरा मुआवज़ा मिला।
विशेष फैसला (दुर्घटना लाभ दावे) वेल्ली बनाम अवीवा इंश्योरेंस (Valle v. Aviva Insurance) अवीवा इंश्योरेंस कंपनी के एडजस्टर ने सुश्री वेल्ली के लाभों को रोक दिया था और उन्हें तब तक बहाल करने से इनकार कर दिया जब तक कि आवेदक बीमाकर्ता की जांच नहीं करवा लेतीं। एडजस्टर ने लिखा था कि अवीवा "बीमाकर्ता की किसी जांच का कार्यक्रम तब तक नहीं बनाएंगी, जब तक बीमित व्यक्ति यह उल्लेख करते हुए कि वे बीमाकर्ता की आगामी किन्हीं जांचों को कराने के लिए तैयार हैं, एक दस्तखत किया हुआ पत्र नहीं दे देतीं।"
आर्बिट्रेटर ने पाया कि इस तरह की वचनबद्धता लेकर, अवीवा ने कानून द्वारा निर्धारित सही प्रक्रिया का उल्लंघन किया है। आर्बिट्रेटर जोसेफ कैंपीसी से सहमत थे कि अवीवा ने नाजायज़ तरीके से उन लाभों को रोका या उनमें देरी की है जिसके लिए आवेदक पात्र थीं और इसलिए आवेदक को एक विशेष फैसला दिया गया।
दो वर्ष के बाद दुर्घटना लाभों की पात्रता शिवनाथन बनाम स्टेट फार्म (Sivananthan v. State Farm) सुश्री शिवनाथन एक कार एक्सीडेंट के बाद क्लास्ट्रोफोबिया और गहरे सदमे से ग्रस्त थीं। उनकी मुश्किलें उनके लिए बेहद अज़ीब और तकलीफ भरी थीं और स्टेट फार्म के यह कहने के बाद कि वे काम पर लौट सकती हैं, उन्होंने एक नौकरी तलाश करने की कोशिश की। हालांकि उनके क्लास्ट्रोफोबिया ने उन्हें अपने अपार्टमेंट के बाहर अकेले एलीवेटर पर चढ़ने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और नौकरी के इंटरव्यू पर जाने से वंचित कर दिया था। सुश्री शिवनाथन एक सुशिक्षित, काम के प्रति उत्साही और ऑफिस की नौकरी जो वे एक्सीडेंट से पहले करती थीं, के लिए शारीरिक रूप से सक्षम थीं। स्टेट फार्म की दलील थी कि वे बैठने, टाइप करने, फोन पर बातचीत करने, फाइलिंग करने और ऑफिस की नौकरी से संबंधित दूसरे शारीरिक पहलुओं में सक्षम थीं, इसलिए वे किसी आगामी लाभ के लिए पात्र नहीं थीं।
आर्बिट्रेटर मोइरा ग्रेसी से सहमत थे
कि काम करने के लिए एक व्यक्ति की क्षमता की जांच में विश्वसनीय तरीके
से उसके दफ्तर पहुंचने की क्षमता, अपनी नौकरी से संबंधित कामों पर
ध्यान लगाने, तनावपूर्ण स्थितियों को सही तरीके से संभालने, सहकर्मियों
और ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार और किसी नौकरी की दूसरी आधारभूत जरूरतों
जैसे कारणों पर विचार किया जाना जरूरी है। इस तरह, सुश्री शिवनाथन इनकम
रिप्लेसमेंट बेनीफिट्स की पात्र
उत्प्रवास - अमानवीय सोच लिज़ैनो सोस्सा परिवार 2006 की गर्मियों में ग्लोब एंड मेल, सीटीवी, और कैनेडियन प्रैस वायर सर्विस में हमारे एक आप्रवास मामले के बारे में बताया गया था। |